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महाविधालय परिचय


राजस्थान का हर्द्यस्थल अजमेर एक मध्यकालीन नगर है | यह दिल्ली- अहमदाबाद औरआगरा-अहमदाबाद रेल मार्ग पर पश्चिम रेलवे का महत्वपूर्ण स्टेशन है | अरावली की तारागढ़ पहाड़ी की तलहटी में बसा , समुंद्र तल से 480 मीटर ऊँचा , जलवायु की दर्ष्टि समशीतोष्ण अजमेर की वर्षा 50 सेमी तथा सामान्य आद्रता 57 प्रतिशत रहती है | आर्य समाजियों के लिए अजमेर महत्वपूर्ण स्थान है , क्योंकी यहाँ आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द ने भिनाय में 30 अक्टूबर ,  1883 ई. को पश्चात् दयानन्द महाविधालय स्वतंत्र भारत के सबसे प्राचीन महाविधालयों में से एक है जो की शिक्षा संस्थान के रूप में प्रतिष्ठित हुआ |

लगभग 250 एकड़ भूमि और कृषि फार्म के रूप में विस्तृत इस महाविधालय में बिना धर्म, जाती, वर्ण और संस्क्रति का भेदभाव किये प्रतिवर्ष लगभग 2500 विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की जाती है | कला , विज्ञान , कृषि , शारीरिक शिक्षा व वाणिज्य संकाय में स्नातिक / स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम चलाए जाते हैं |

स्थापना और विकास

इस महाविधालय को राजस्थान राज्य के सबसे प्राचीन एवं एकमात्र प्रतिष्ठित महाविधालय के रूप प्राप्त है | महान योगी स्वामी दयानन्द सरस्वती जी की शिक्षा व मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए सन‌‌् 1942 में स्थापिक इस महाविधालय में विधार्थी एवं समाज उपयोगी शिक्षा प्रदान की जा रही है | प्रति वर्ष लगभग 2500 विधार्थी इस महाविधालय में शिक्षा ग्रहण करके महत्वपूर्ण पदों पर रहतेहुए राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं | महाविधालय का गौरव यहाँ का पुस्तकालय है जिसमे 1.5 लाख पुस्तको एवं प्रत्रीकाओं का संग्रह है | महाविधालय में बाहर से आने वाले छात्र एवं छात्राओं के लिय पृथक-पृथक छात्रावास की व्यवस्था है | दयानन्द महाविधालय को यदि लाला सूरजभान ने लघु विश्वविधालय कहा तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है क्योंकी यहाँ शिक्षा एवं ज्ञान का अथाह भण्डार एवं सुविधाएँ छात्रों को प्रदान की जाती है | सन‌‌् 2000 से डीएवी कॉलेज प्रबन्धकृत समिति नई दिल्ली के दिशानिर्देशन में दयानन्द महाविधालय , अजमेर शिक्षा के क्षेत्र में नित नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है |